एक् प्यारा सा सप्ना
जिस्मे दिख ता कोइ अप्ना
नीन्द् टुटि, आन्ख् खुलि
शोचुन् मैन् क्या होगा हो, मेरा अप्ना
एक् प्यरा सा सप्ना
जिस्मे दीखा ता कोइ अप्ना
शज् दज् के मैन् निकलि डफ़्तर्
ऱस्टे पे होता है ट्रफ़्फ़िc जाम् अक्सर्
भट्टि जलि, गाडि रुखि
सडक् के उस्पार् दीखा, सप्ने क अप्ना
सोचुन् मैन् येह् हक़ीकत् हैन्, या कल्पना
एक् प्यरा सा सप्ना
जिस्मे दीखा ता कोइ अप्ना
उता रही ती सहेली मुझ्को
आ गया स्टोप् उटर्ना हैन् तुझ्को
आन्ख् खुलि, सप्ना टुटा
सप्ना मैन् देखा ता एक् प्यरा सा सप्ना
आब् सोचु मै कहान् होगा हो, मेरा अप्ना
एक् प्यरा सा सप्ना
जिस्मे दिखा ता कोइ अप्ना
-- Kavitha
Tuesday, April 22, 2008
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